वो पल ....
वो पल कुछ खास थे
जब हम सब साथ थे
खाना, पीना, हसना, रोना
साथ साथ ज़िन्दगी जीना
साथ साथ ज़िन्दगी सीखना
सब कुछ करना और कुछ भी ना करना
अपने पर हसना और बिन बात के रोना
वो पल कुछ खास थे
वो पल कुछ खास थे
जब आप हमारे पास थे
खोए खोए दिन रात थे
बस हम और आप थे
नज़रौ मे अहसास थे
हाथो में हाथ थे
धड़कन को सुनते थे
लमहों को रोकते थे
और ये सोचते थे कि ऐसा होता कि वेसा होता
कि वो शाम कभी ना डूबती
कि वो दिन कभी ना सोता
वो पल कुछ खास थे
जब आप हमारे पास थे
वक्त गुजरता गया और हर पल दिल ये धड़कता रहा
और हर धड़कन पर मिलने की गुज़ारिश भी करता रहा
क्भी रोता रहा और क्भी हस्ता रहा
बस इक मुलाकात के लिए
इक पल का इनत्जार था हमे
वो पल आया भी तो बस पल के लिए
अब आ गया है तो इस पल में डूब जते हैं
आइएे इस पल को भी ख़ास बनाते हैं
हम और तुम फिर से इक हो जाते हैं
वो पल कुछ खास थे, ये पल भी खास हैं और आने वाले पल भी खास होंगे ....

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