धोखा
धोखा खुद को देतें हैं वो जो कहते हैं कि खुश तो हैं वो
आखौ की नमी को पी कर हसते रहते हैं वो
सपनो दिन बर वो सीते थे और जीते थे वो
हसते थे गाते थे और गुनगुनाते भी थे वो
आखों को बन्द करके कुछ सोचो और हमको याद करने से रोको
हमको भुला दिया कहते है यादो को कैसे भुलोगे
मुनासिब कैसे होगा हमको भुलना कि हम हकीकत हैं कोइ ख़वाब नही
धोखा खुद को देतें हैं वो जो कहते हैं कि खुश तो हैं वो
धोखा खुद को देतें हैं वो जो कहते हैं कि प्यार नहीं है
